Saturday, March 17, 2018

जुंबिशें - - -ग़ज़ल 2



शोर ए किब्रियाई1 है, और स्वर हरे ! हरे !!
बख़्श दे इन्हें ख़ुदा, ईशवर उन्हें तरे.

वह है सच जो तूर पर, माइले ए कलाम है?2
या कि उस पहाड़ पर, जो कि है जटा धरे??

आसमाँ पर वह उड़ा, आप का यक़ीं अरे?
कैसा आदमी था वह, अपनी ज़ात से परे?

क़ब्र को खिला रहे हो, तुम सवाब की ग़िज़ा,
तुम को क्या ज़मीन, पर कोई भूक से मरे.

यह ख़ुदा का घर नहीं है, तेरे घर में है ख़ुदा,
क्यूँ भटक रहा है तू, काबा काशी बाँवरे.

है ख़बर कि चल पड़े, दोनों तेरी राह पर,
ये ख़बर भी आएगी, दोनों फिर से लड़ मरे.

१-ईश वंदना का शोर २-अर्थात मूसा जो तूर पर्वत पर जाकर ईश्वर से बातें करते थेs

!شورِ کِبریائی ہے اور سوَر ہرے! ہرے 
اِنکو خدا نجات دے، اُنکو ا یشور ترے٠ 

وہ ہے سچ جوطور  پر مائلِ کلام ہے
یا کہ اُس پہاڑ پر جو کہ ہے جٹا دھرے٠ 

آسماں پہ وہ اُڑا ؟ آپ یقیں ارے!  
کیسا آدمی تھا وہ؟ اپنی ذات سے پرے٠ 

قبر کو کھلا رہے ہو تم، ثواب کی غذا 
تم کو کیا زمین پر، کوئی بھوک سے مرے٠ 

یہ خدا کا گھر نہیں ہے، تیرے گھر میں ہے خدا
کیوں بھٹک رہا تو، کعبہ کاشی بانورے

ہے خبر کہ چل پڑے، دونوں تیری راہ پر 
یہ خبربھی آیگی، باہمی وہ لڑ مرے٠ 

No comments:

Post a Comment